आजादी के छह दशक से अधिक समय गुजरने के बावजूद आज भी देश में सबके लिए
शिक्षा एक सपना ही बना हुआ है। देश में भले ही शिक्षा व्यवस्था को
चुस्त-दुरुस्त बनाने की कवायद जारी है, लेकिन देश की बड़ी आबादी के गरीबी
रेखा के नीचे गुजर-बसर करने के मद्देनजर सभी लोगों को साक्षर बनाना अभी भी
चुनौती बनी हुई है। ऐसे मे सवाल पैदा होता है कि काहे का बाल दिवस ???